विष्णु जी के 1008 नाम in hindi | For Baby Boy Or Girl

विष्णु जी के 1008 नाम है। श्री हरि विष्णु को हिन्दू धर्म के त्रिदेवों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि जगत का पालन श्री हरि विष्णु जी ही करते हैं। विष्णु जी देवी लक्ष्मी (विष्णुजी की पत्नी) के साथ क्षीरसागर में वास करते हैं।

विष्णु जी के विशेष 1008 नाम निम्न है।

1008 Names Lord Krishna In Hindi – कृष्ण जी के 1008 नाम

विष्णु जी के 1008 नाम in hindi.

विश्वम्
विष्णु
वषट्कार
भूतभव्यभवत्प्रभुः
भूतकृत
भूतभृत
भाव
भूतात्मा
भूतभावन
पूतात्मा
परमात्मा
मुक्तानां परमागतिः
अव्ययः
पुरुषः
साक्षी
क्षेत्रज्ञः
अक्षर
योगः
योगविदां नेता
प्रधानपुरुषेश्वर
नारसिंहवपुः
श्रीमान्
केशव
पुरुषोत्तम
सर्व
शर्व
शिव
स्थाणु
भूतादि
निधिरव्यय
सम्भव
भावन
भर्ता
प्रभव
प्रभु
ईश्वर
स्वयम्भू
शम्भु
आदित्य
पुष्कराक्ष
महास्वन
अनादिनिधन
धाता
विधाता
धातुरुत्तम
अप्रमेय
हृषीकेश
पद्मनाभ
अमरप्रभु
विश्वकर्मा
मनु
त्वष्टा
स्थविष्ठ
स्थविरो ध्रुव
अग्राह्य
शाश्वत
कृष्ण
लोहिताक्ष
प्रतर्दन
प्रभूत
त्रिककुब्धाम
पवित्रं
मङ्गलंपरम्
ईशान
प्राणद
प्राण
ज्येष्ठ
श्रेष्ठ
प्रजापति
हिरण्यगर्भ
भूगर्भ
माधव
मधुसूदन
ईश्वर
विक्रमी
धन्वी
मेधावी
विक्रम
क्रम
अनुत्तम
दुराधर्ष
कृतज्ञ
कृति
आत्मवान्
सुरेश
शरणम
शर्म
विश्वरेता
प्रजाभव
अह
सम्वत्सर
व्याल
प्रत्यय
सर्वदर्शन
अज
सर्वेश्वर
सिद्ध
सिद्धि
सर्वादि
अच्युत
वृषाकपि
अमेयात्मा
सर्वयोगविनिःसृत
वसु
वसुमना
सत्य
समात्मा
सम्मित
सम
अमोघ
पुण्डरीकाक्ष
वृषकर्मा
वृषाकृति
रुद्र
बहुशिरा
बभ्रु
विश्वयोनि
शुचिश्रवा
अमृत
शाश्वतस्थाणु
वरारोह
महातपा
सर्वग
सर्वविद्भानु
विश्वक्सेन
जनार्दन
वेद
वेदविद
अव्यङ्ग
वेदाङ्ग
वेदवित्
कवि
लोकाध्यक्ष
सुराध्यक्ष
धर्माध्यक्ष
कृताकृत
चतुरात्मा
चतुर्व्यूह
चतुर्दंष्ट्र
चतुर्भुज
भ्राजिष्णु
भोजनं
भोक्ता
सहिष्णु
जगदादिज
अनघ
विजय
जेता
विश्वयोनि
पुनर्वसु
उपेन्द्र
वामन
प्रांशु
अमोघ
शुचि
उर्जित
अतीन्द्र
संग्रह
सर्ग
धृतात्मा
नियम
यम
वेद्य
वैद्य
सदायोगी
वीरहा
माधव
मधु
अतीन्द्रिय
महामाय
महोत्साह
महाबल
महाबुद्धि
महावीर्य
महाशक्ति
महाद्युति
अनिर्देश्यवपु
श्रीमान
अमेयात्मा
महाद्रिधृक्
महेष्वास
महीभर्ता
श्रीनिवास
सतांगति
अनिरुद्ध
सुरानन्द
गोविन्द
गोविदांपति
मरीचि
दमन
हंस
सुपर्ण
भुजगोत्तम
हिरण्यनाभ
सुतपा
पद्मनाभ
प्रजापति
अमृत्यु
सर्वदृक्
सिंह
सन्धाता
सन्धिमान्
स्थिर
अज
दुर्मर्षण
शास्ता
विश्रुतात्मा
सुरारिहा
गुरु
गुरुतम
धाम
सत्य
सत्यपराक्रम
निमिष
अनिमिष
स्रग्वी
वाचस्पतिउदारधी
अग्रणी
ग्रामणी
श्रीमान्
न्याय
नेता
समीरण
सहस्रमूर्धा
विश्वात्मा
सहस्राक्ष
सहस्रपात्
आवर्तन
निवृत्तात्मा
संवृत
संप्रमर्दन
अहःसंवर्तक
वह्नि
अनिल
धरणीधर
सुप्रसाद
प्रसन्नात्मा
विश्वधृक
विश्वभुज
विभु
सत्कर्ता
सत्कृत
साधु
जह्नुनु
नारायण
नर
असंख्येय
अप्रमेयात्मा
विशिष्ट
शिष्टकृत
शुचि
सिद्धार्थ
सिद्धसंकल्प
सिद्धिद
सिद्धिसाधन
वृषाही
वृषभ
विष्णु
वृषपर्वा
वृषोदर
वर्धन
वर्धमान
विविक्त
श्रुतिसागर
सुभुज
दुर्धर
वाग्मी
महेन्द्र
वसुद
वसु
नैकरूप
बृहद्रूप
शिपिविष्ट
प्रकाशन
ओजस्तेजोद्युतिधर
प्रकाशात्मा
प्रतापन
ऋद्ध
स्पष्टाक्षर
मन्त्र
चन्द्रांशु
भास्करद्युति
अमृतांशूद्भव
भानु
शशबिन्दु
सुरेश्वर
औषधं
जगतसेतु
सत्यधर्मपराक्रमः
भूतभव्यभवन्नाथ
पवन
पावन
अनल
कामहा
कामकृत्
कान्त
काम
कामप्रद
प्रभु
युगादिकृत
युगावर्त
नैकमाय
महाशन
अदृश्य
व्यक्तरूप
सहस्रजित्
अनन्तजित्
इष्ट
अविशिष्ट
शिष्टेष्ट
शिखण्डी
नहुष
वृष
क्रोधहा
क्रोधकृत्कर्ता
विश्वबाहु
महीधर
अच्युत
प्रथित
प्राण
प्राणद
वासवानुज
वाजसन
शृङ्गी
जयन्त
सर्वविज्जयी
सुवर्णबिन्दु
अक्षोभ्य
सर्ववागीश्वरेश्वर
महाह्रद
महागर्त
महाभूत
महानिधि
कुमुद
कुन्दर
कुन्द
पर्जन्य
पावन
अनिल
अमृतांश
अमृतवपु
सर्वज्ञ
सर्वतोमुख
सुलभ
सुव्रत
सिद्ध
शत्रुजित
शत्रुतापन
न्यग्रोध
उदुम्बर
अश्वत्थ
चाणूरान्ध्रनिषूदन
सहस्रार्चि
सप्तजिह्व
सप्तैधा
सप्तवाहन
अमूर्ति
अनघ
अचिन्त्य
भयकृत
भयनाशन
अणु
बृहत
कृश
स्थूल
गुणभृत
निर्गुण
महान्
अधृत
स्वधृत
स्वास्य
प्राग्वंश
वंशवर्धन
भारभृत्
कथित
योगी
योगीश
सर्वकामद
आश्रम
श्रमण
क्षाम
सुपर्ण
वायुवाहन
धनुर्धर
धनुर्वेद
दण्ड
दमयिता
दम
अपराजित
सर्वसह
नियन्ता
अनियम
अयम
सत्त्ववान्
सात्त्विक
सत्य
सत्यधर्मपरायण
अभिप्राय
प्रियार्ह
अर्ह
प्रियकृत्
प्रीतिवर्धन
विहायसगति
ज्योति
सुरुचि
हुतभुक
विभु
रवि
विरोचन
सूर्य
सविता
रविलोचन
अनन्त
हुतभुक
भोक्ता
सुखद
नैकज
अग्रज
अनिर्विण्ण
सदामर्षी
लोकाधिष्ठानाम्
अद्भूत
सनात्
सनातनतम
कपिल
कपि
अव्यय
स्वस्तिद
स्वस्तिकृत्
स्वस्ति
स्वस्तिभुक
स्वस्तिदक्षिण
अरौद्र
कुण्डली
चक्री
जन्ममृत्युजरातिग
भूर्भुव:स्वस्तरु
तार
सविता
प्रपितामह
यज्ञ
यज्ञपति
यज्वा
यज्ञाङ्ग
यज्ञवाहन
यज्ञभृत्
यज्ञकृत्
यज्ञी
यज्ञभुक
यज्ञसाधन
यज्ञान्तकृत्
यज्ञगुह्यम्
अन्नं
अन्नाद
आत्मयोनि
स्वयंजात
वैखान
सामगायन
देवकीनन्दन
सृष्टा
क्षितीश
पापनाशन
शङ्खभृत्
नन्दकी
चक्री
शार्ङ्गधन्वा
गदाधर
रथाङ्गपाणि
अक्षोभ्य
सर्वप्रहरणायुध
चतुरश्र
गभीरात्म
विदिश
व्यादिश
दिश
अनादि
भुवोभुव
लक्ष्मी
सुवीर
अधाता
आधारनिलय
ऊर्ध्वग
एकात्मा
जनजन्मादि
जनन
तत्त्वं
तत्त्ववित्
पण
पुष्पहास
प्रजागर
प्रणव
प्रमाणम्
प्राणजीवन
प्राणद
प्राणनिलय
प्राणभृत्
भीम
भीमपराक्रम
रुचिराङ्गद
विश्वम
अपांनिधि
अधिष्ठानम
अप्रमत्त
प्रतिष्ठित
स्कन्द
स्कन्दधर
धुर्य
वरद
वायुवाहन
वासुदेव
बृहद्भानु
आदिदेव
पुरन्दर
अशोक
तारण
तार
शूर
शौरि
जनेश्वर
अनुकूल
शतावर्त
पद्मी
पद्मनिभेक्षण
पद्मनाभ
अरविन्दाक्ष
पद्मगर्भ
शरीरभृत्
महार्दि
ऋद्ध
वृद्धात्मा
महाक्ष
गरुडध्वज
अतुल
शरभ
भीम
समयज्ञ
हविर्हरि
सर्वलक्षणलक्षण्य
लक्ष्मीवान्
समितिञ्जय
विक्षर
रोहित
मार्ग
हेतु
दामोदर
सह
महीधर
महाभाग
वेगवान
अमिताशन
उद्भव
क्षोभण
देव
श्रीगर्भ
परमेश्वर
करणं
कारणं
कर्ता
विकर्ता
गहन
गुह
व्यवसाय
व्यवस्थान
संस्थान
स्थानद
ध्रुव
परर्द्धि
परमस्पष्ट
तुष्ट
पुष्ट
शुभेक्षण
राम
विराम
विरज
मार्ग
नेय
नय
अनय
वीर
शक्तिमतां श्रेष्ठ
धर्म
धर्मविदुत्तम
वैकुण्ठ
पुरुष
प्राण
प्राणद
प्रणव
पृथु
हिरण्यगर्भ
शत्रुघ्न
व्याप्त
वायु
अधोक्षज
ऋतु
सुदर्शन
काल
परमेष्ठी
परिग्रह
उग्र
सम्वत्सर
दक्ष
विश्राम
विश्वदक्षिण
विस्तार
स्थावरस्थाणु
प्रमाणम्
बीजमव्ययम्
अर्थ
अनर्थ
महाकोश
महाभोग
महाधन
अनिर्विण्ण
स्थविष्ठ
अभू
धर्मयूप
महामख
नक्षत्रनेमि
नक्षत्री
क्षम
क्षाम
समीहन
यज्ञ
ईज्य
महेज्य
क्रतु
सत्रं
सतांगति
सर्वदर्शी
विमुक्तात्मा
सर्वज्ञ
ज्ञानमुत्तमम्
सुव्रत
सुमुख
सूक्ष्म
सुघोष
सुखद
सुहृत्
मनोहर
जितक्रोध
वीरबाहु
विदारण
स्वापन
स्ववश
व्यापी
नैकात्मा
नैककर्मकृत्
वत्सर
वत्सल
वत्सी
रत्नगर्भ
धनेश्वर
धर्मगुप
धर्मकृत्
धर्मी
सत्
असत्
क्षरम्
अक्षरम्
अविज्ञाता
सहस्रांशु
विधाता
कृतलक्षण
गभस्तिनेमि
सत्त्वस्थ
सिंह
भूतमहेश्वर
आदिदेव
महादेव
देवेश
देवभृद्गुरु
उत्तर
गोपति
गोप्ता
ज्ञानगम्य
पुरातन
शरीरभूतभृत्
भोक्ता
कपीन्द्र
भूरिदक्षिण
सोमप
अमृतप
सोम
पुरुजित
पुरुसत्तम
विनय
जय
सत्यसंध
दाशार्ह
सात्वतांपति
जीव
विनयितासाक्षी
मुकुन्द
अमितविक्रम
अम्भोनिधि
अनन्तात्मा
महोदधिशय
अन्तक
अज
महार्ह
स्वाभाव्य
जितामित्र
प्रमोदन
आनन्द
नन्दन
नन्द
सत्यधर्मा
त्रिविक्रम
महर्षि कपिलाचार्य
कृतज्ञ
मेदिनीपति
त्रिपद
त्रिदशाध्यक्ष
महाशृङ्ग
कृतान्तकृत्
महावराह
गोविन्द
सुषेण
कनकाङ्गदी
गुह्य
गभीर
गहन
गुप्त
चक्रगदाधर
वेधा
स्वाङ्ग
अजित
कृष्ण
दृढ
संकर्षणोऽच्युत
वरुण
वारुण
वृक्ष
पुष्कराक्ष
महामना
भगवान्
भगहा
आनन्दी
वनमाली
हलायुध
आदित्य
ज्योतिरादित्य
सहिष्णु
गतिसत्तम
सुधन्वा
खण्डपरशु
दारुण
द्रविणप्रद
दिवःस्पृक्
सर्वदृग्व्यास
वाचस्पतिरयोनिज
त्रिसामा
सामग
साम
निर्वाणं
भेषजं
भिषक्
संन्यासकृत
शम
शान्त
निष्ठा
शान्ति
परायणम्
शुभाङ्ग
शान्तिद
स्रष्टा
कुमुद
कुवलेशय
गोहित
गोपति
गोप्ता
वृषभाक्ष
वृषप्रिय
अनिवर्ती
निवृत्तात्मा
संक्षेप्ता
क्षेमकृत्
शिव
श्रीवत्सवक्षा
श्रीवास
श्रीपति
श्रीमतां वर
श्रीद
श्रीश
श्रीनिवास
श्रीनिधि
श्रीविभावन
श्रीधर
श्रीकर
श्रेय
श्रीमान
लोकत्रयाश्रय
स्वक्ष
स्वङ्ग
शतानन्द
नन्दि
ज्योतिर्गणेश्वर
विजितात्मा
अविधेयात्मा
सत्कीर्ति
छिन्नसंशय
उदीर्ण
सर्वतश्चक्षु
अनीश
शाश्वतस्थिर
भूशय
भूषण
भूति
विशोक
शोकनाशन
अर्चिष्मान
अर्चित
कुम्भ
विशुद्धात्मा
विशोधन
अनिरुद्ध
अप्रतिरथ
प्रद्युम्न
अमितविक्रम
कालनेमिनिहा
वीर
शौरि
शूरजनेश्वर
त्रिलोकात्मा
त्रिलोकेश
केशव
केशिहा
हरि
कामदेव
कामपाल
कामी
कान्त
कृतागम
अनिर्देश्यवपु
विष्णु
वीर
अनन्त
धनंजय
ब्रह्मण्य
ब्रह्मकृत
ब्रह्मा
ब्रह्म
ब्रह्मविवर्धन
ब्रह्मवित
ब्राह्मण
ब्रह्मी
ब्रह्मज्ञ
ब्राह्मणप्रिय
महाक्रम
महाकर्मा
महातेजा
महोरग
महाक्रतु
महायज्वा
महायज्ञ
महाहवि
स्तव्य
स्तवप्रिय
स्तोत्रं
स्तुति
स्तोता
रणप्रिय
पूर्ण
पूरयिता
पुण्य
पुण्यकीर्ति
अनामय
मनोजव
तीर्थकर
वसुरेता
वसुप्रद
वसुप्रद
वासुदेव
वसु
वसुमना
हवि
सद्गति
सत्कृति
सत्ता
सद्भूति
सत्परायण
शूरसेन
यदुश्रेष्ठ
सन्निवास
सुयामुन
भूतावास
वासुदेव
सर्वासुनिलय
अनल
दर्पहा
दर्पद
दृप्त
दुर्धर
अपराजित
विश्वमूर्ति
महामूर्ति
दीप्तमूर्ति
अमूर्तिमान्
अनेकमूर्ति
अव्यक्त
शतमूर्ति
शतानन
एक
नैक
सव
कः
किं
यत्
तत्
पदमनुत्तमम्
लोकबन्धु
लोकनाथ
माधव
भक्तवत्सल
सुवर्णवर्ण
हेमाङ्ग
वराङ्ग
चन्दनाङ्गदी
वीरहा
विषम
शून्य
घृताशी
अचल
चल
अमानी
मानद
मान्य
लोकस्वामी
त्रिलोकधृक्
सुमेधा
मेधज
धन्य
सत्यमेधा
धराधर
तेजोवृष
द्युतिधर
सर्वशस्त्रभृतांवर
प्रग्रह
निग्रह
व्यग्र
नैकशृङ्ग
गदाग्रज
चतुर्मूर्ति
चतुर्बाहु
चतुर्व्यूह
चतुर्गति
चतुरात्मा
चतुर्भाव
चतुर्वेदवित्
एकपात्
समावर्त
अनिवृत्तात्मा
दुर्जय
दुरतिक्रम
दुर्लभ
दुर्गम
दुर्ग
दुरावासा
दुरारिहा
शुभाङ्ग
लोकसारङ्ग
सुतन्तु
तन्तुवर्धन
इन्द्रकर्मा
महाकर्मा
कृतकर्मा
कृतागम
उद्भव
सुन्दर
सुन्द
रत्ननाभ
सुलोचन
अर्क
विक्रमी
उर्जितशासन
शब्दातिग
शब्दसह
शिशिर
शर्वरीकर
अक्रूर
पेशल
दक्ष
दक्षिण
क्षमिणां वर
विद्वत्तम
वीतभय
पुण्यश्रवणकीर्तन
उत्तारण
दुष्कृतिहा
पुण्य
दुःस्वप्ननाशन
वीरहा
रक्षण
सन्त
जीवन
पर्यवस्थित
अनन्तरूप
अनन्तश्री
जितमन्यु
भयापह

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